Friday, December 25, 2009

उपभोक्ता संरक्षण पर मीडिया का नजरिया ठीक नहीं- हरवीर सिंह

बिज़नस भास्कर अख़बार के आर्थिक संपादक हरबीर सिंह नें मीडिया पर आरोप लगाया की उपभोक्ता संरक्षण मामले पर उपभोक्ता के हित का ख्याल नहीं करती है नतीजा आज भारत मैं बाजार और सरकार पूरी तरह हावी है , जिसके चलते ये तंत्र आम उपभोक्ता का मानसिक और आर्थिक शोषण कर रही है। आर्थिक मामले पर पिछले १३ बरसों से पत्रकारिता कर रहे हरबीर सिंह नें कहा की सरकार और आम लोग किसी न किसी चीज का उपभोक्ता हैं मगर आश्चर्य है की अभी तक एक बार भी संसद में इस मामले पर विधेयक लाने की बात दूर , बहस तक नहीं हुई। लोकसभा और राज्यसभा मैं ५०० सांसदों की उपभोक्ता मसले पर अब तक कुछ नहीं बोलना यह बताता है की जनप्रतिनिधि को चिंता ही नहीं है। उन्होंने कहा की कानून में घालमेल के चलते उपभोक्ताओं को अपने हक के लिया जागरूक होना होगा । १९८६ में बने कानून की समीक्षा के लिए कमीशन अभी तक अपना काम शुरू भी नहीं किया है। बहुरास्ट्रीय कम्पनियाँ की भारत की बाजारों पर पकर मजबूत हो रही है वही उपभोक्ता की पकर सरकार और बाजार पर ढीली पर जा रही है .आने बाले दिनों में परिणाम घातक होगा। जनता को जनांदोलन करने की जरुरत है।
दिल्ली की संस्था अवेक इंडिया फोंड़ेशन द्वारा २५ december को आयोजित संगोष्ठी मैं नेहरु युवा केंद्र , के निदेशक चंद्रशेखर प्राण नें कहा की उपभोक्ता आज सरकार और बाजार का दवा बना है जिसका इस्तेमाल आज हो रहा है.हर कोई आज इसका मरीज है.समाज सरकार,और बाजार पर आम उपभोक्ता की पकर ढीली पर गयी है.नतीजा मुनाफा के चक्कर में आज kanoon रूपी दवा का इस्तेमाल सरकार और बाजार कर रही है। प्राण नें कहा की सेवा ,सुविधा ,कानून मुहेया के नाम पर सरकार ,उपभोक्ता का शोषण कर रही हैं। उन्होंने कहा की चर्चा ,निर्णय ,क्रिया तीनों astar par जनसहभागिता jaruri है। मगर आज चर्चा विशेषज्ञ , निर्णय राजनेता और सरकार,तथा क्रिया जनता अस्तर पर होता है.यानि जनता यानि उपभोक्ता सहभागी बना लाचार बनी है।
वरिष्ठ पत्रकार उमेश कुमार नें कहा की हिंदुस्तान मैं ५०० संस्था उपभोक्ता संरक्षण पर work कर रही है, लेकिन दुर्भाग्य है की आज निजी कम्पनियाँ ,बाजार ,सरकार उपभोक्ता को जमकर शोषण कर रही है.न्यायिक प्रक्रिया मैं उलझें हैं आम ,नतीजा सरकारी तंत्र भी बाजार की तरह उपभोक्ता को सहभागी यानि शोषण करने का जरिया बना दिया है। आयोजक अवेक इंडिया के महासचिव जीतेन्द्र नारायण सिंह नें कहा की भारत मैं उपभोक्ता के हितों को लेकर जनक्रांति की जरुरत है। जिसके लिए राज्य,जिला और ब्लाक लेवल पर संगठन को मजबूत बनकर सरकार,और बाजार से लड़ना होगा.तभी उपभोक्ता को न्याय मिलेगा। वरिस्थ पत्रकार कुमार अमिताभ नें कहा की उपभोक्ता की शोषण सरकार कर रही है.इसका मुकाबला जनता को करना होगा.

Saturday, December 12, 2009

हमार और फोकस पर ग्रहण

हमार और focus टीवी चैनल मैं फिलहाल हालत ठीक नहीं है.पहले ग्रुप हेड कुमार संजोया सिंह की छुट्टी अब लौन्चिंग टीम मैं रहे कुमार नरेन्द्र सिंह और गौतम मयंक का संसथान से हटना यह बताता है की भीतर मैं घमासान चल रहा है। नरेन्द्र सिंह , चैनल के मालिक मातंग सिंह के काफी करीब माने जाते थे। अब राह जुदा हो चुका है। चैनल शुरू से ही राजनीती का केन्द्र बना है। अब तो हद हो गई है। जिस उदय चंद्र को कुमार संजोया सिंह लाइव इंडिया से लाकर आए थे वही अब चैनल के प्रमुख बने हैं। अब संजोया और नरेन्द्र सिंह के करीबी लोगों को चलता किया जा रहा है. संजोया सिंह के करीबी को भगाया गया है। चैनल के मालिक मातंग सिंह और उनके भाई बिहार मैं कमला सिंह ख़ुद हर चीज पर बारीकी से नजर रखे हुआ हैं। बर्तमान मैं चैनल प्रमुख उदय चंद्र राजपूत की समझे जाने बाले इस चैनल मैं दोनों राजपूत पत्रकारों संजोया सिंह और नरेन्द्र सिंह को हटवाने मैं सफल रहे हैं। जाहिर है की राजनीती के चक्रबुह मैं फंसा हमार और focas चैनल कुल मिलकर अपने अस्तित्वा के लिये संघर्स करता दिख रहा है। चैनल मैं कोई प्रोग्राम नहीं है की दर्शक जुड़े .

Thursday, November 26, 2009

दुबे बने रांची गए न्यूज़ - ११ के पत्रकार

झारखण्ड मैं चुनावी सरगर्मी के बीच चैनल खोलने की होड़ मची है। अभी रांची से शुरू हुआ न्यूज़ - ११ में दिल्ली से लेकर दूसरे जगह पर काम कर रहे पत्रकार मोटी salary की लालच में रांची में इस चैनल से जुड़ गए। चैनल ऑन एयर भी हो गया है। मगर २ महीने बीतने को है लेकिन अभी तक salary नहीं मिली है.चैनल से जुड़े पत्रकार अब मानसिक रूप से परेशान हो गए हैं। प्रबंधन की और से कोई सार्थक जबाब नहीं मिलते देख कई पत्रकार अब दूसरे चैनल नौकरी के लिए बातचीत भी शुरू कर दिया है। कई ने नाम नहीं छपने की शर्त पर बताया की मत पूछो हाल की , salary नहीं मिलने से परेशानी में फंस गए हैं। इस चैनल में सहारा, साधना से लेकर कई चैनल, अख़बार को अलविदा कह चुके लोग जुड़े हैं। कहा जाता है की मधु कोड़ा की अचल सम्पति इस चैनल में लगी है.चैनल लंच होने से पहले चर्चा में रहा है । अब salary नहीं मिलने से चैनल के कर्मियों बेचेनी है। शुरुआत में ही वितीय संकट से पत्रकार हैरान और हताशा में दिख रहे है। इस सबके बीच रांची से नया न्यूज़ चैनल लाँच की तैयारी चल रही है। इसके करता- धर्ता धनबाद के डॉ विकास हजरा हैं। रांची से इसके पहले चैनल -३६५ लौंच हो चुका है जो विवादों में रहा है।इनके चैनल प्रमुख अमल जैन को जेल भी जन पड़ा था। अब जमानत पर हैं।

साधना न्यूज़ -उत्तरांचल हिमाचल चैनल होंगे लॉंच

साधना न्यूज़ का एक और क्षेत्रीय न्यूज़ चैनल उत्तराखंड -हिमाचल लॉंच होना जा रहा है ! हिमालय के वादियों मैं साधना न्यूज़ अगले महीने टेस्ट सिग्नल पर जाने की तैयारी मैं। जानकारी के मुताबिक चैनल की तैयारी अन्तिम चरण मैं है। मध्य प्रदेश - छत्तीसगढ़ और बिहार -झारखण्ड मैं धमाका करने के बाद साधना का उत्तराखंड-हिमाचल तीसरा न्यूज़ चैनल होगा। चैनल मैं स्टाफ की भरती प्रक्रिया अन्तिम चरण मैं है. २००९ के पहले महीने मैं पुरे दमखम के साथ चैनल दिखने लगने की सम्भावना है। साधना न्यूज़ के निदेशक बरिष्ठ पत्रकार प्रभात डबराल हैं। साधना का धार्मिक चैनल अब दिश टीवी पर भी आ गया है।

Monday, November 23, 2009

गुंजन सिन्हा बने मौर्या टीवी हेड

पटना से लॉंच होनेवाले पहला टीवी चॅनेल मौर्या में भारी बदलाव होने की खबर है.प्रकाश झा के इस चॅनेल को चलाने की ज़िम्मेवारी अब गुंजन सिन्हा संभालने जा रहे हैं.गुंजन सिन्हा इसके पहले ई टीवी बिहार को बिहार में लॉंच करा चुके हैं. बाद में श्री सिन्हा को रमोजी फिल्म सिटी चार हिन्दी क्षत्रिय चॅनेल का हेड बनाए गये।पिच्छले १ साल से श्री सिन्हा अलीगढ़ में विश्वविद्यालय में अध्यापन सा जुड़े थे. नवभारत टाइम्स पटना मैके सीनियर पत्रकार रह चुके सिन्हा के सामने मौर्या को बिहार में कड़ी चुनोती मिलेगी. बिहार झारखंड में पहले से ई टीवी,सहारा और साधना चॅनेल में टक्कर चल रही है.मौर्या टीवी से जुड़ने की खाबर पर गुंजन सिन्हा ने बतया की में मौर्या को बहतेर बनाने का प्रयास करूँगा. न्यू टीम बनाए जाने है. इसके पहले सुजीत झा कमान संभाल रहे थे. पुराने सभी लोगो पर गाज गिर सकती हैं. गुंजन सिन्हा के साथ मुकेश कुमार के भी जुड़ने की खबर है.

Tuesday, November 3, 2009

मेरी बात

मीडिया का चेहरा बदल सा गया है.आम लोगों की नज़र मैं बर्तमान मैं मीडिया की छवि पर सवाल उठ रहा है .हमारी कोशिश रहेगी की , निष्पक्ष लिखूं।
धन्यवाद
आपका

किशोर कुमार सिंह , पत्रकार ,दिल्ली